Tuesday, July 13, 2010

मंहगाई डायन खाय जात है!



सखी सैंया तो खूब ही कमात है,मंहगाई डायन खाय जात है, पीपली लाइव फिल्म के इस गाने ने जमकर धूम मचा दी है। शायद इसलिए कि गाना ही कुछ ऐसा है, शायद इसलिए रघुवीर यादव की अदाकारी लजबाब है, या फिर शायद इसलिए कि गाने के बोल हकीकत को बयां करते हैं, वजह इन तीनों में से कोई भी हो लेकिन सुनकर मजा आ जाता है। लेकिन क्या ये गाना सिर्फ मजे के लिए बनाया या गाया गया है, ये सबसे बड़ा सवाल है? पीपली लाइव की कहानी क्या है, इसका पता तो फिल्म के रिलीज होने के बाद ही चलेगा, लेकिन आमिर खान इस फिल्म में बढ़ती मंहगाई पर प्रहार किया है, ये गाने के बोल साफ बयां करते हैं। गरीब आदमी पर मंहगाई क्या सितम ढा सकती है, ये फिल्म के प्रोमों को देखकर पता चलता है। क्योंकि फिल्म की पब्लिसिटी खूब जोर-शोर से हो रही है, ऊपर से ये फिल्म आमिर के प्रोडक्शन की है, यानि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर चलना लगभग तय माना जा रहा है। ये बात भी तय है कि गरीबी पर फिल्माई इस फिल्म को, पैसे वाले लोग किसी मल्टीप्लेक्स में पॉप कॉर्न और कोलड्रिंग के स्वाद के साथ खूब ठहाके लगाकर देखने वाले हैं। लेकिन फिल्म के रिलीज होने के बाद दर्शकों के सामने जो सबसे बड़ा सवाल होगा, वो ये है कि ये फिल्म सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि गरीब आदमी की वो कहानी है जिसे मंहगाई के चलते आय दिन आत्महत्या करनी पड़ती है। और मीडिया उसकी मौत को हॉट स्टोरी बनाकर पूरे दिन खेलता रहता है। कसूर शायद मीडिया का भी नहीं है, क्योंकि उसको बाकी चैनलों के साथ दौड़ना है। लेकिन उस मौत का जिम्मदार कौन होता है? आखिर क्यों किसी गरीब को ऐसा कदम उठान पड़ता है? इन सवालों के लिए सरकार या उसकी मौत से जुड़े मुद्दे को कटघरे में खड़ा करे तो शायद इन गरीबों की या मंहगाई की समस्या का निदान हो सके। लेकिन इस मंहगाई की समस्या से तभी निपटा जा सकता है जब हर आदमी कदम से कदम मिलाकर चले। क्योंकि बढ़ती मंहगाई के लिए सिर्फ सरकार को दोष देना ठीक नहीं है, और ना ही उसका पक्ष लेना। मैं तो लोगों से सिर्फ ये कहना चाहता हूं कि फिल्म कोई भी हो कैसी भी हो लोगों के मनोरंजन के लिए ही बनती है, लेकिन उस फिल्म को देखने वाले दर्शक मनोरंजन की दुनिया से बाहर आकर ज़रा सा उसके बारे में सोचेंगे, तो शायद विकल्पों के कई रास्ते खुल जाएं।

Saturday, July 10, 2010

हम जुदा हो गए..


प्यार के वो वादे,

परिवार की खुशी के आगे,

मानो किसी जुर्म की सज़ा हो गए,

उन सब के चेहरे पर तो खुशी आ गई,

लेकिन, हम जुदा हो गए...


सिर्फ उनका प्यार पाने के लिए,

ईश्वर पर जो श्रृद्धा जताई थी,

एक बार तो हमारी भक्ति भी रंग लाई थी,

लेकिन अब, शायद वो भी हमसे ख़फ़ा हो गए,

और, हम जुदा हो गए...


शुरुआत में जहां हर मंजिल थी आसां,

दुनिया के कदमों से दूर, हर कदम थे हम पर मेहरबां,

आज उन्हीं की आहट से, सारे रास्ते फ़ना हो गए,

दुनिया की नज़र ऐसी लगी, कि सब हमसे बेवफ़ा हो गए,

और, हम जुदा हो गए...

Thursday, July 8, 2010

बर्बाद या चमत्कार


उसके घर जाने के साथ,

घरवालों को कुछ बताने के साथ,

हमारी प्रेम कहानी लाएगी इक नया रंग,

प्रभु ने चाहा, तो मेरा प्यार होगा मेरे संग,

नहीं तो टूट जाएगा, दिल का ये दर्पण,

और, मैं हो जाऊंगा अपंग।


अब उनसे की गई भक्ति का,

चमत्कार देखने का वक्त आ गया है,

क्योंकि प्रेम कहानी पर हमारी,

एक काला बादल छा गया है,

ये बादल अब छटेंगे या नहीं,

ये तो मेरा दिल नहीं जानता,

क्योंकि पागल है ये दिल,

अपने आगे किसी की नहीं मानता।


अब मुझे, मेरे दिल और मेरे प्यार को,

सिर्फ और सिर्फ इक चीज का है इंतजार,

कि कब करेंगे ईश्वर, अल्लाह और परमेश्वर,

हम दोनों और हमारी भक्ति पर चमत्कार।

जैसे कल की ही बात है


आंखो की नमी अभी सूखी भी नहीं,

यादों का आंचल अभी थमा भी नहीं,

कि इस दिल को याद वो आने लगे,

अब आंखों में मेरी, उन पलों की याद है,

मानो जैसे कल की ही बात है।


साया जो मेरा, सदा से मेरे साथ है,

अब साथ वो भी छोड़ने लगा है, क्योंकि...

अतीत का साया मेरे असतित्व को घेरने लगा है,

लेकिन, साया तो मेरे साथ है,

मानो जैसे कल की ही बात है।


अब जी रहा हूं तो इस शर्त पर,

कि जान दे नहीं सकता, वादा जो किया था उस जान से,

लेकिन, जिंदा रह नहीं सकता, यादों के उस तूफान से,

क्योंकि, वो ख्वाबों में अब भी मेरे साथ है,

मानो जैसे कल की ही बात है।

अतीत की काली परछाई


गुज़रे हुए कल के, तूफां के झोंको की वो चुभन

दिल में असिमित दर्द का, अहसास दिला सी जाती है।

दिल के ना चाहने पर भी, अतीत की वो काली परछाई

कल के भविष्य को, थोड़ा सा झुलसा सी जाती है।

मैं हर मोड़ पर जीत का, नया फ़साना लिखना चाहता हूं

ये आकर उसे कालिक से, थोड़ा सा मिटा सी जाती है।

हार की ना सोचकर चलने वाले मुझ को

ये अपना कड़वा स्वाद चखा ही जाती है।

मैं जहां शीत लहर का ठंडा स्पर्श पाना चाहता हूं

ये आकर रेगिस्तां की गर्म लू का अहसास करा सी जाती है।

दिल के अरमानों का फूल खिलने से पहले

उस पर पतझड़ का कहर बरपा सी जाती है।

मेरे स्वस्थय तन से लगकर, मुझे अपंग बना सी जाती है।

दिल के ना चाहने पर भी, अतीत की काली परछाई

बार-बार क्यूं आती, बार-बार क्यूं आती है।

जब प्यार किसी से होता है...

कल जहां प्यार की समझ नहीं थी हमको

दोस्ती भी क्या है इसकी उपज नहीं थी हमको

इन दोनों की गहराई का रिश्ता पढ़ नहीं पाते थे

बातें, खेल, पढ़ाई के लिए हम सबको मित्र बनाते थे

पर साथ में जो धीरे-धीरे, यूं मिलकर हम बड़े हुए

बातें, खेल, पढ़ाई के साथ, दोस्ती की अहमियत भी समझने लगे

न जाने क्यूं ये मन, बस फिर आपमें ही खोया रहता

हर पल हमारी आंखों में, आपका सुंदर सा मुखड़ा रहता

शायद उस वक्त हम दोस्ती से कुछ ऊपर सोचने लगे

क्योंकि मन ही मन हम आपको पसंद जो करने लगे

फिर तो रोजाना आप-ही-आप इस दिल में बसने लगे

और बदन तो हमारा रहा, पर इसमें महकने आप लगे

फिर दिल ने चाहा बतादें, हम आपसे कितनी मोहब्बत करने लगे

कि आपको देखें तो जीने, ना देखें तो मरने लगे

आपको बताया जब हमने, जिस तरह दुनिया में

सूरज का किरण से, आग का अगन से

हवा का गगन से और फूलों का चमन से

कुछ ऐसा ही हम आपसे ये रिश्ता जोड़ना चाहते हैं

मोहब्बत है इतनी आपसे, कि दो बदन एक जान होना चाहते हैं

खुश किस्मत थी तक़दीर हमारी, जिसे आप पढ़ने लगे

हमारे प्यार की चुनर ओढ़ कर, आप इसमें संवरने लगे

आज जीवन का हर रिश्ता, यूं जुड़ा है तुमसे ऐसे

जो टूटेगा ये रिश्ता, तो मर जाएंगे हम जैसे

शाहजहां ने मुमताज को दिया,

प्यार का नज़राना, ताजमहल के रूप में

हम आपको दे रहें है,

दिल से निकला ये अफसाना, इस कविता के रूप में

प्यार और सच्चाई के अक्षरों से लिखी

इस कविता को तुम गलत मत समझना

हम पर शक़ करके, हमें आजमने की कोशिश न करना

बस इतना कहे देते हैं हम आपसे

आपको पाने की हसरत में सब कुछ है कर गुजरना।

Saturday, July 3, 2010

ये खेल नहीं आसां!


एक फुटबॉल, 22 दीवाने, हजारों दर्शक और करोड़ों खेलप्रेमी फीफा वर्ल्ड कप में ऐसा नजारा, हर उस मैच में देखने को मिला, जिसमें फुटबॉल की दिग्गज टीमों ने हल्ला बोल किया। इन टीमों के 11 खिलाड़ी भले ही मैदान पर अकेले खेले हों लेकिन इनका साथ हजारों दर्शकों और करोड़ों खेलप्रेमियों ने दिया। इस उम्मीद से कि विश्व विजेता का ताज एक बार फिर इन टीमों के माथे सजे, लेकिन बात चाहे क्रिकेट का हो, हॉकी का हो या फिर फुटबॉल की, मंजिल तक आते-आते कई टीमों के सफर थम जाता है, लेकिन इस बार वर्ल्ड कप में ऐसी चार दिग्गज टीमों का सफर पहले ही खत्म हो गया, जो शायद विश्व विजेता बनने की प्रबल दावेदार थीं। ये टीमें हैं ब्राजील, इटली, फ्रांस और इंग्लैंड। बार विश्व कप जीत चुकी ब्राजील की टीम ने टूर्नामेंट में धमाकेदार शुरुआत की और लीग मुकाबले में दक्षिण कोरिया और आइवरी कोस्ट को हराया तो पुर्तगाल से ड्रॉ खेला। इसके बाद प्री क्वार्टर फाइनल में उसने चिली को 3-0 से धो दिया। लेकिन क्वार्टर फाइनल में नीदरलैंड ने उसे 2-1 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। जीतने वाली दूसरी बड़ी टीम थी इटली, अब तक चार वार विश्व कप का खिताब जीतने वाली इटली टूर्नामेंट के लीग मुकाबलों में ही बैकफुट पर दिखी। लीग मुकाबले में उसने पराग्वे और न्यूजीलैंड से ड्रॉ खेला, तो स्लोवाकिया ने आखिरी लीग मुकाबले में इटली को 3-2 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। अब फ्रांस को भी देख लेते हैं। साल 1998 में विश्व कप जीतने वाली फ्रांस ने अपना पहला लीग मुकाबला उरुग्वे के साथ ड्रॉ खेला, लेकिन उसे अगले दो मुकाबलों में मैक्सिको और मेजबान दक्षिण अफ्रीका से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ उसका सफर लीग मुकाबले में ही खत्म हो गया। विश्व कप के खिताब पर एक बार कब्जा जमा चुकी इंग्लैंड ने टूर्नामेंट में अपने पहले दोनों लीग मुकाबले अमेरिका और अल्जीरिया से ड्रॉ खेले, लेकिन अपने आखिरी लीग मुकाबले में उसने स्लोवेनिया को 1-0 से हराकर नॉक आउट में जगह बना ली। लेकिन नॉक आउट दौर में उसे जर्मनी के हाथों 4-1 से करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ उसका विश्व कप जीतने का सपना भी टूट गया। बहरहाल फीफा विश्व कप 2010 का ताज किसी भी टीम के माथे सजे, लेकिन धुरंधरो की हार के लिए ये वर्ल्ड कप हमेशा याद रखा जाएगा।