
एक फुटबॉल, 22 दीवाने, हजारों दर्शक और करोड़ों खेलप्रेमी फीफा वर्ल्ड कप में ऐसा नजारा, हर उस मैच में देखने को मिला, जिसमें फुटबॉल की दिग्गज टीमों ने हल्ला बोल किया। इन टीमों के 11 खिलाड़ी भले ही मैदान पर अकेले खेले हों लेकिन इनका साथ हजारों दर्शकों और करोड़ों खेलप्रेमियों ने दिया। इस उम्मीद से कि विश्व विजेता का ताज एक बार फिर इन टीमों के माथे सजे, लेकिन बात चाहे क्रिकेट का हो, हॉकी का हो या फिर फुटबॉल की, मंजिल तक आते-आते कई टीमों के सफर थम जाता है, लेकिन इस बार वर्ल्ड कप में ऐसी चार दिग्गज टीमों का सफर पहले ही खत्म हो गया, जो शायद विश्व विजेता बनने की प्रबल दावेदार थीं। ये टीमें हैं ब्राजील, इटली, फ्रांस और इंग्लैंड। बार विश्व कप जीत चुकी ब्राजील की टीम ने टूर्नामेंट में धमाकेदार शुरुआत की और लीग मुकाबले में दक्षिण कोरिया और आइवरी कोस्ट को हराया तो पुर्तगाल से ड्रॉ खेला। इसके बाद प्री क्वार्टर फाइनल में उसने चिली को 3-0 से धो दिया। लेकिन क्वार्टर फाइनल में नीदरलैंड ने उसे 2-1 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। जीतने वाली दूसरी बड़ी टीम थी इटली, अब तक चार वार विश्व कप का खिताब जीतने वाली इटली टूर्नामेंट के लीग मुकाबलों में ही बैकफुट पर दिखी। लीग मुकाबले में उसने पराग्वे और न्यूजीलैंड से ड्रॉ खेला, तो स्लोवाकिया ने आखिरी लीग मुकाबले में इटली को 3-2 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। अब फ्रांस को भी देख लेते हैं। साल 1998 में विश्व कप जीतने वाली फ्रांस ने अपना पहला लीग मुकाबला उरुग्वे के साथ ड्रॉ खेला, लेकिन उसे अगले दो मुकाबलों में मैक्सिको और मेजबान दक्षिण अफ्रीका से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ उसका सफर लीग मुकाबले में ही खत्म हो गया। विश्व कप के खिताब पर एक बार कब्जा जमा चुकी इंग्लैंड ने टूर्नामेंट में अपने पहले दोनों लीग मुकाबले अमेरिका और अल्जीरिया से ड्रॉ खेले, लेकिन अपने आखिरी लीग मुकाबले में उसने स्लोवेनिया को 1-0 से हराकर नॉक आउट में जगह बना ली। लेकिन नॉक आउट दौर में उसे जर्मनी के हाथों 4-1 से करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ उसका विश्व कप जीतने का सपना भी टूट गया। बहरहाल फीफा विश्व कप 2010 का ताज किसी भी टीम के माथे सजे, लेकिन धुरंधरो की हार के लिए ये वर्ल्ड कप हमेशा याद रखा जाएगा।
वाह क्या बात है....
ReplyDelete