नियम खेल के लिए बने हैं, न कि खेल नियम के लिए, और जब भी किसी नियम ने खेल को हानि पहुंचाई, तो उस नियम को बदल दिया गया। ठीक ऐसे ही जब क्रिकेट के खेल की शुरुआत हुई, तो इसकी डिक्सनरी में कई नियम थे, लेकिन वक्त और हालात के साथ उनमें से कई नियम इस डिक्सनरी से गायब हो गए। मौजूदा दिनों में क्रिकेट के ‘नो बॉल’ के नियम ने एक बार फिर इस जेंटलमैन गेम की छवि पर सवाल खड़े कर दिए है, जिसके चलते आईसीसी (अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद) के सामने नो बॉल के नियम में मंथन करने का सवाल खड़ा हो गया है। वैसे क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे वाक्ये दफ्न हैं जो मैदान पर एक बार घटे तो दूसरी बार आईसीसी ने इन्हें दोहराने का मौका नहीं दिया। यानि आईसीसी ने वक्त के साथ कई नियम बदल डाले। क्रिकेट के ऐसे ही कुछ वाक्यों से हम आपको रुबरु कराते हैं, जिनके घटने के बाद इन नियमों को हमेशा के लिए बदल दिया गया।
घटना नंबर-1
दिसंबर 1979 में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच पर्थ में खेले गए पहले टेस्ट के दौरान घटी। जब दूसरे दिन का खेल शुरू होने पर ऑस्ट्रेलिया के डेनिस लिली ने एल्युमिनियम के बल्ले का इस्तेमाल किया। दिन के शुरु में किसी ने इस पर आपत्ति नहीं जताई, लेकिन जब इस बल्ले से गेंद को नुकसान पहुंचने लगा, तो फिर अंपायरों ने लिली के इस बैट को बदलवा दिया और इस प्रकरण के बाद आईसीसी ने अपने नियमों में लकड़ी के बैट और इसकी लंबाई चौड़ाई का नियम बना दिया गया।
घटना नंबर-2
पहले के तेज गेंदबाज एक ओवर में पूरी छह गेंद बाउंसर फेंका करते थे, क्योंकि उन्हें ऐसा करने की पूरी आजादी थी। 1933 में जब ऑस्ट्रेलिया की टीम इंग्लैंड दौरे पर गई, तो तत्कालिक कप्तान डगलस जोर्डन ने ब्रैडमेन पर अंकुश लगाने के लिए अपने गेंदबाजों को उनके शरीर को निशाना बनाकर गेंदबाजी करने के लिए कहा, जिसके चलते कई बल्लेबाज घायल भी हुए। तब आईसीसी ने गेंदबाजों के खतरनाक तेवरों को देखते हुए एक ओवर में एक बाउंसर का नियम बना दिया।
घटना नंबर-3
ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच 1981 को मेलबर्न में खेले गए वनडे मैच के दौरान ग्रेग चैपल ने अपने छोटे भाई ट्रेवर चैपल को अंडर आर्म गेंद फेंकने की सलाह दी, ताकि न्यूजीलैंड का कोई बल्लेबाज छक्का लगाकर मैच ना जीता दे। और उन्होंने ऐसी ही एक गेंद फेंककर टीम को जीत दिला दी। नियमों के हिसाब से ये गेंद पूरी तरह सही थी, क्योंकि आईसीसी के नियमों में अंडर आर्म गेंद फेंकने का कोई नियम नहीं था। लेकिन इस घटना को खेल भावना के लिए सही नहीं माना गया। इस घटना के बाद आईसीसी ने अपने नियमों से अंडरआर्म गेंदबाजी पर प्रतिबंध लगा दिया।
यानि क्रिकेट के इतिहास में ऐसे कई वाक्ये घटे हैं जिनकी आलोचना के बाद आईसीसी ने अपने नियमों को बदला है। ऐसे में मौजूदा नो बॉल प्रकरण ने एक बार फिर आईसीसी को अपने नियम बदलने की तरफ इशारा कर दिया है। दरअसल ट्राई सीरीज में भारत-श्रीलंका के मैच में भारत की मैच जीतने और वीरेंद्र सहवाग को शतक पूरा करने के लिए एक रन की जरुरत थी। लेकिन लंकाई ऑफ स्पिनर सूरज रंदीव ने जानबूझकर नो बॉल फेंकी जिस पर सहवाग ने छक्का लगा दिया। क्योंकि नो बॉल का रन टीम के खाते में पहले जोड़ा जाता है, इसलिए सहवाग अपना शतक पूरा ना कर सके। ऐसे में सवाल ये खड़ा हो गया है कि अगर टीम को जीत के लिए दो रनों की जरुरत होती तो फिर टीम के खाते में सात और सहवाग के खाते मे छह रन जुड़ जाते। आईसीसी को अपने इस नियम पर जल्द ही कोई अनुचित कदम उठाना चाहिए ताकि भविष्य में कोई और खिलाड़ी सहवाग की तरह अपने शतक से महरुम ना रह जाए।
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