
मैं अपने ब्लॉग पर जिसके बारे में लिखने जा रहा हूं, वो शख्स किसी पहचान का मोहताज नहीं है, क्योंकि वो अपनी पहचान ना सिर्फ हिन्दुस्तान में बल्कि पूरे ब्रम्हाण में बना चुका है। लेकिन उसके बारे में लिखने से पहले ना जाने क्यूं मुझे नानी की कहानियां याद आ रहीं हैं। वो कहानियां जिनमें राजा-रानी थे, चोर-सिपाही थे, बंदर-भालू थे सिवाय किसी योद्धा के...जी हां आप सही सोच रहे हैं, मेरी नानी ने कभी भी मुझे किसी योद्धा की कहानी नहीं सुनाई और शायद यही वजह रही कि बचपन से ही राजा-रानी, चोर-पुलिस और बंदर-भालू की पहचान तो हो गई...लेकिन योद्धा को जानने का मौका नहीं मिल सका। हांलाकि इसमें मेरी नानी काकोई कसूर नहीं है, क्योंकि मेरी नानी ने भी कभी किसी योद्धा को नहीं देखा होगा। लेकिनअसली योद्धा की पहचान आखिर मुझे उस वक्त हो गई जब सचिन तेंदुलकर को मैंने क्रिकेटके मैदान पर बल्लेबाजी करते हुए देखा। मैंने योद्धा को बारे में सुना था कि वो मैदान-ए-जंगमें अपने शौर्य के प्रदर्शन से दुश्मन के किले को फतेह करता है और सचिन को मैंने जब-जबमैदान-ए-क्रिकेट में देखा तो उन्होंने भी अपने विरोधियों के साथ कुछ ऐसा ही किया। सचिनने पहली बार क्रिकेट के मैदान पर साल 1989 में कदम रखा था, वो भी पाकिस्तान जैसीटीम के खिलाफ। उस समय मैंने सचिन को भले ही बल्लेबाजी करते हुए नहीं देखा, लेकिनजब से होश संभाला और क्रिकेट की समझ हुई तब से उन्हें सिर्फ बल्लेबाजी करते हुए हीदेखा है। भारतीय क्रिकेट में ना जाने कितने कप्तान और खिलाड़ी आए और चले गए। लेकिनसचिन का बल्ला गुजरते वक्त और बदलते मौसम के साथ जवां हो रहा है। मैदान पर भारीबल्ले से खेलना, गेंद पर जमकर प्रहार करना और फिर रन बनाने के लिए सरपट भागना।रन बनाने के इस सफर में कई खिलाड़ी मेरे देखते ही देखते संन्यास ले चुके हैं, लेकिनसचिन आज भी उसी जोश और ज़ज़्बे के साथ भारतीय क्रिकेट टीम में मुस्तेद हैं, जैसे अपनाकरियर उन्होंने अभी शुरू ही किया है। 20 साल का लंबा सफर लेकिन सचिन की फिटनेसऐसी कि चोट और बीमरियों ने कभी उनके आस-पास भी दस्तक नहीं दी। कीर्तिमानों केशिखर पर चढ़ते-चढ़ते उन्होंने उस रास्ते को तय कर लिया जहां से वो क्रिकेट की दुनिया केभगवान बन गए। वाकई इस भगवान के लिए मेरे दिल में बहुत सारी श्रृद्धा है। लेकिन सचिनको मैंने कभी भगवान के रुप में नहीं देखा। मैंने तो उन्हें क्रिकेट के मैदान पर उस सिपाही के रुप में देखा है, जो भारत की जीत और खेलप्रेमियों की खुशी के लिए हमेशा मैदान पर लड़तारहता है, और तभी से मैंने उन्हें एक योद्धा माना है, टीम इंडिया का योद्धा...द ग्लेडिएटर।
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