एक अन्ना, दो अन्ना, अनगिनत अन्ना
मेरे दाएं तरफ अन्ना, मेरे बाएं तरफ अन्ना
टीवी चैनल पर अन्ना, अखबारों के पन्नों पर अन्ना
जिसे दिखाई नहीं देता, वो भी अन्ना
जिसे सुनाई नहीं देता, वो भी अन्ना
जो चल नहीं सकता, वो भी अन्ना
भष्टाचार की लड़ाई में, ये देश बन गया अन्ना-अन्ना
मेरे पांव में हैं बेड़ियां, तुम्हारे पास न आने की
लेकिन, यकीन मानों...
सर से लेकर पांव तक, खून का हर कतरा-कतरा
बैठे-बैठे बन चुका है, अन्ना-अन्ना, अन्ना-अन्ना
तुमने पुकारा तो एकजुट हुआ है हिन्दुस्तान
मिटा दो भष्टाचार, बदल दो नियत घूसखोरों की
फिर न होगा इंकलाब, न निकलेंगे लोग घरों से बाहर
बदल दो लकीरें इस देश की तकदीर की
कि याद करें लोग, तुम्हें जाने के बाद
और कहें...
एक था अन्ना, एक था अन्ना।
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