Monday, June 6, 2011

मैं और गोल्ड कप हॉकी


बात 23 मई की है, मैं अपनी डैस्क पर बैठा हुआ बुलेटिन तैयार कर रहा था। अचानक मेरे पीछे से आवाज आई, नरेंद्र जी आपको सर याद कर रहे हैं, सर का नाम सुनकर मैं थोड़ा सा नर्वस हो गया, हिम्मत जुटाई और मैं सर के केबिन में पहुंचा। थोड़ी देर के बाद मुझसे बातचीत का नंबर आया, और एक नई जिम्मेदारी के मुझे थमा दी गई। दरअसल संपादक जी ने कहा कि आपको कल से औबेदुल्ला हॉकी टूर्नामेंट कवर करने के लिए जाना है। क्योंकि इस टूर्नामेंट का लाइव टेलिकास्ट हमारे चैनल पर हो रहा था, इसलिए मैं थोड़ा सा नर्वस हो गया। लेकि ये सोचकर कि ये मेरे लिए एक चुनौती है, मेरा जोश दोगुना हो गया। फिर क्या अगले दिन शुरू हुआ औबेदुल्ला खां गोल्ड कप हॉकी टूर्नामेंट का लाइव कवरेज। जब में भोपाल के ऐतिहासकि ऐशबाग हॉकी स्टेडियम पहुंचा तो मेरी आंखों में एक अलग तरह की चमक थी, कुछ करने का जज्बा मेरे अंदर दस्तक दे रहा था, आखिरकार शाम के 5 बजे और शुरू हो गया कवरेज। पहले बात लाइव और हॉकी खिलाड़ियों तक सीमित रही, लेकिन देखते ही देखते बात हॉकी कॉमेंट्री पर गई। पता नहीं कॉमेंट्री कैसी हुई, लेकिन उस जिम्मेदारी को भी मैंने पूरा कर दिया। टूर्नामेंट में भारतीय हॉकी के स्टार खिलाड़ी आए हुए थे, और उन्हें अपेल चैनल पर लाना और लाइव बातचीत करना मेरे लिए दिलचस्प अनुभव रहा, जिसे मैं शायद ही कभी भूल पाऊं। कमाल की बात तो ये हुई कि प्रभजोत सिंह को देखकर मैंने उसे पहचान लिया, लेकिन मुझे प्रभजोत का नाम याद हीं आ रहा था। मैं प्रभजोत के पास खड़ा हुआ था कि पीछे से किसी ने आवाज दी वेल प्लेड प्रभजोत। इस आवाज ने मेरी मुश्किलें थोड़ी सी आसान कर दी और फिर मैं प्रभजोत को अपने न्यूज चैनल पर लाइव लाने में कामयाब रहा। प्रभजोत के साथ बातचीत के बाद मेरे कॉन्फिडेंस काफी बढ़ गया। टूर्नामेंट धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया और मैं भी अपना बेस्ट प्रदर्शन करता गया। अब आई 31 जून, यानि टूर्नामेंट के फाइनल की तारीख। फाइनल में सभी की निगाहें मुझ पर टिकी हुईं थी, क्योंकि ये मेरे लिए भी किसी फाइनल के कम नहीं था, यानि मुझे पिछले दिनों की तुलना में अपना और बेहतर प्रदर्शन करना था। अपनी यूनिट के साथ जब हम ऐशबाग पहुंचे, तो एक नया नजारा आंखों के सामने था। दरअसल हमारा कंपटीटर चैनल लाइव के लिए अपना सेटअ जमा चुका था, यानि अब मैदान के अंदर हॉकी और बाहर लाइव का मुकाबला होने वाला था। सारा सेटअप तैयार हुआ और शुरू हो गई लाइव की जंग। फाइनल में खिलाड़ियों के साथ लाइव वन टू वन, मंत्रियों के साथ लाइव बातचीत, पब्लिक के बीच में जाकर कुछ नया करना और जोशीले अंदाज में कॉमेंट्री। इस सभी चीजों ने हमारे लाइव को औरों से अलग बना दिया। एक बात और जैसे-जैसे मैदान पर वक्त बीता मैच को लाइव करने के लिए चैनलों की भीड़ जमा होती गई। आखिरकार मैच खत्म हुआ औ साथ ही खत्म हुआ मेरा शानदार अनुभव। मैं नहीं जानता कि आखिर मैंने इस लाइव के दौरान किस तरह की भूमिका निभाई। लेकिन मैदान पर मौजूद कई बड़ी हस्तियों ने मेरे कार्य को सराहा, मुझे दफ्तर से कई लोगों ने बधाई दी शायद यही मेरी उपलब्धि थी। न हॉकी टूर्नामेंट से मुझे बहुत कुछ हासिल हुआ, लेकिन खुशी सबसे ज्यादा इस बात की थी, कि इस कंप्टीशन के बीच हॉकी का स्तर थोड़ी देर के लिए ऊंचा हो गया था।

(लाइव कवरेज कैसा रहा देखने के लिए FACEBOOK पर NARENDRA JIJHONTIYA को सर्च करें, और अपनी प्रतिक्रिया जरुर दें। )

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